कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में फेक न्यूज, डीपफेक, फैक्ट-चेकिंग और पत्रकारिता की विश्वसनीयता का अध्ययन

Authors

  • डॉ. मुकुट कुमार अग्रवाल असिस्टेंट प्रोफेसर, पत्रकारिता और जनसंचार विभाग, इंदिरागाँधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी, हरियाणा

DOI:

https://doi.org/10.5281/zenodo.23016735

Keywords:

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल पत्रकारिता, भ्रामक सूचना, दुष्प्रचार, तथ्य-जाँच, सामाजिक माध्यम, पत्रकारिता की विश्वसनीयता।

Abstract

इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में पत्रकारिता और जनसंचार की प्रकृति में तीव्र परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इंटरनेट, स्मार्टफोन, सामाजिक माध्यम, वीडियो मंच, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा सृजनात्मक कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने समाचारों के संकलन, लेखन, संपादन, प्रसारण, वितरण और उपभोग की पारंपरिक प्रक्रियाओं को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। डिजिटल माध्यमों ने हिंदी पत्रकारिता को भौगोलिक सीमाओं से मुक्त करते हुए विशाल पाठक वर्ग उपलब्ध कराया है, वहीं फर्जी समाचार, भ्रामक सूचना, दुष्प्रचार, कृत्रिम रूप से निर्मित सामग्री, गहरे नकली वीडियो, सामाजिक माध्यमों के अल्गोरिद्म, सनसनीखेज प्रस्तुति और पत्रकारिता की नैतिकता से जुड़े प्रश्नों ने उसकी विश्वसनीयता के सामने नई चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता पत्रकारिता में समाचार संकलन, ध्वनि से पाठ निर्माण, अनुवाद, समाचार-सार निर्माण, शीर्षक निर्माण, सामग्री का वर्गीकरण और तथ्य-जाँच जैसे कार्यों में उपयोगी सिद्ध हो सकती है। दूसरी ओर, इसी तकनीक का उपयोग अत्यंत कम समय में नकली पाठ, नकली चित्र, कृत्रिम आवाज और गहरे नकली वीडियो बनाने में भी किया जा सकता है।

इस शोध-पत्र में हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के बदलते स्वरूप का अध्ययन करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भ्रामक सूचना, दुष्प्रचार, गहरे नकली वीडियो, तथ्य-जाँच तथा पत्रकारिता की विश्वसनीयता के पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन मुख्यतः द्वितीयक स्रोतों, उपलब्ध शोध साहित्य, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों, पत्रकारिता संबंधी मानकों और डिजिटल मीडिया से संबंधित दस्तावेजों पर आधारित है। अध्ययन से यह निष्कर्ष सामने आता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को पत्रकार का विकल्प बनाने के बजाय पत्रकार की सहायता करने वाली तकनीक के रूप में अपनाना अधिक उपयुक्त होगा।

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Published

01-09-2026

How to Cite

डॉ. मुकुट कुमार अग्रवाल. (2026). कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में फेक न्यूज, डीपफेक, फैक्ट-चेकिंग और पत्रकारिता की विश्वसनीयता का अध्ययन. International Educational Applied Scientific Research Journal, 11(09), 81–86. https://doi.org/10.5281/zenodo.23016735