व्यक्तिकता एवं निर्वैक्तिकता का अन्तर्द्वन्द: ‘सरोज स्मृति’ – डॉ. भरत कुमार

Authors

  • डॉ. भरत कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर

Keywords:

निराला, सरोज स्मृति, शोकगीत, निर्वैक्तिकता, व्यक्तिता, सृजन, कलाकृति आदि

Abstract

1935 में रचित निराला की ‘सरोज स्मृति’ शोकगीत हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण रचना है। इस रचना के माध्यम से निज से सर्व, व्यैक्तिक से निर्वैक्तिक भावों की समीक्षा करना आलेख का लक्ष्य रहा है। इसके साथ ही निराला के जीवन संघर्ष, साहित्यिक एवं सामाजिक संघर्ष की अभिव्यक्ति को दर्शाना महत्वपूर्ण लक्ष्य रहा है। हिंदी साहित्य में एक पिता-पुत्री के प्रेम, वात्सल्य, पिता की जिजीविषा, पीड़ा, आर्थिक संकट आदि अनेक पलों को रेखांकित किया गया है। निराला की पुत्री सरोज की जीवन यात्रा के माध्यम से मध्यम वर्गीय पिता के दर्द को निराला ने दर्शाया है। निराला की ‘राम की शक्ति पूजा’, ‘तुलसीदास’ के इतर अंग्रेजी साहित्य की शोकगीत परम्परा में हिंदी का सबसे महत्वपूर्ण एवं लंबा शोकगीत ‘सरोज स्मृति’ है। जिसका साहित्यिक मापदंडो के साथ ही टी.एस. इलियट के निर्वैक्तिता के सिद्धान्त के आधार पर मूल्यांकन करने का प्रयास किया गया है।

References

I. निराला का काव्य, डॉ. जगदीश प्रसाद श्रीवास्तव, पृष्ठ 191

II. राग विराग, सं. राम विलास शर्मा, पृष्ठ 80

III. निराला आत्महंता आस्था: दूधनाथ सिंह, पृ. 132

IV. पाश्चात्य आलोचना शास्त्रीय निबंध – अनुवादक काशीप्रसाद सिंह,

V. राग विराग, सं. राम विलास शर्मा, पृष्ठ 83

VI. राग विराग, सं. राम विलास शर्मा, पृष्ठ 84

VII. शक्ति पूंज निराला, डॉ. कृष्णदेव बारही, पृ.3

VIII. राग विराग, सं. राम विलास शर्मा, पृष्ठ 84

IX. निराला का काव्य, डॉ. बच्चन सिंह, पृष्ठ 90

X. राग विराग, सं. राम विलास शर्मा, पृष्ठ 86

XI. पाश्चात्य आलोचना शास्त्रीय निबंध – अनुवादक काशीप्रसाद सिंह,

XII. राग विराग, सं. राम विलास शर्मा, पृष्ठ 86-87

XIII. राग विराग, सं. राम विलास शर्मा, पृष्ठ 87

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Published

15-02-2021

How to Cite

डॉ. भरत कुमार. (2021). व्यक्तिकता एवं निर्वैक्तिकता का अन्तर्द्वन्द: ‘सरोज स्मृति’ – डॉ. भरत कुमार. International Educational Applied Scientific Research Journal, 6(2). Retrieved from https://ieasrj.com/journals/index.php/ieasrj/article/view/346