भारतीय संगीत के अंतर्गत मनोविज्ञान की अवधारणा

Authors

  • डॉ महेश चंद्र पाण्डे एसोसिएट प्रोफेसर, संगीत विभाग, एम०बी०राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी (नैनीताल)

Abstract

आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में मनोविज्ञान का अत्यन्त महत्व है और इससे शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता भी सिद्ध होती है। आज शिक्षा मनोविज्ञान के अध्ययन के फलस्वरूप समस्त शैक्षणिक परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में अध्ययन होने लगा है। शिक्षा में मनोविज्ञान का आधार आ जाने के कारण शिक्षण के प्रति दृष्टिकोण ही बदल गया है। शिक्षा उपकरणों के अन्तर्गत विभिन्न यंत्र चित्र, रेडियो, सिनेमा, टेलीविजन सभी उपयोगी सिद्ध होने लगे है। आधुनिक शिक्षा में मनोविज्ञान, एक अहम भूमिका अदा कर रहा है। मनोवैज्ञानिक ढंग से सोचने-समझने और तदनुसार क्रियान्वयन से शिक्षण की दृष्टि में काफी बदलाव आ गया है। संगीत अपने आप में सृजन प्रक्रिया का द्योतक है। संगीत में प्रदर्शन हो या शिक्षण, सृजनशीलता हमेशा विद्यमान रहती है। मनुष्य जबसे ही संगीत के संपर्क में आता है और शिक्षा-दीक्षा प्रारंभ करता है, सृजनात्मक प्रक्रिया आरंभ हो जाती है। शिक्षण के क्रम में चाहे शिक्षक हो या शिक्षार्थी, अथवा प्रदर्शन के क्रम में चाहे कलाकार हो या श्रोता, दोनों के लिये ही यह सृजनशील है। इस संपूर्ण प्रक्रिया में दोनों ही आनन्दाविभोर होते हैं और आनन्द का सृजन होता है। कलाकार और श्रोता तथा शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही इस सृजन की प्रक्रिया में बराबर के भागीदार होते हैं और आपस में सामंजस्य स्थापित करते है।

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Published

15-09-2021

How to Cite

डॉ महेश चंद्र पाण्डे. (2021). भारतीय संगीत के अंतर्गत मनोविज्ञान की अवधारणा. International Educational Applied Scientific Research Journal, 6(9). Retrieved from https://ieasrj.com/journals/index.php/ieasrj/article/view/619