नाद व ध्वनि विज्ञान
Abstract
नाद और ध्वनि विज्ञान संगीत के दो परस्पर पूरक आधार हैं। नाद संगीत की कलात्मक एवं आध्यात्मिक अभिव्यक्ति है, जबकि ध्वनि विज्ञान उसके भौतिक एवं वैज्ञानिक पक्ष को स्पष्ट करता है। दोनों के समन्वित अध्ययन से संगीत की संरचना, स्वर-उत्पत्ति, वाद्य निर्माण तथा श्रवण अनुभव को गहराई से समझा जा सकता है। यही कारण है कि संगीत शिक्षा, अनुसंधान और प्रदर्शन—तीनों में नाद एवं ध्वनि विज्ञान का विशेष महत्व है। किसी बाजार की भीड़ में या मेले में यदि कोई जोर से चिल्ला रहा हो, कोई धीरे से बोल रहा हो, किसी ओर बच्चे रो रहे हो या कोई हंस रहा हो, इन क्रियाओं के द्वारा वायु में जो कंपन होंगे वह अनियमित होंगे और यह अनियमित कंपन शोरगुल ही कहलाएंगे। परंतु इसी के विपरीत जब इन्ही कंपनों को ‘ध्वनि विज्ञान’ की सहायता से व्यवस्थित कर दिया जाए और नियमित और स्थिर कंपनों में परिवर्तित कर दिया जाए, तो इससे संगीत उपयोगी ध्वनि की प्राप्ति होगी।
इतना ही नहीं ऐसा करके ही वैज्ञानिक नवीन आविष्कारों का सृजन करते हैं। चाहे वह संगीत के क्षेत्र में हो, चिकित्सा के क्षेत्र में हो अथवा शिक्षा के क्षेत्र में हो।
References
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