बाल विकास और अधिगम में चित्रों की भूमिका

Authors

  • राजेश कुमार निमेश सह-आचार्य, एमपीडी, सीआईईटी, एनसीईआरटी, नई दिल्ली

Keywords:

बाल विकास, प्रारंभिक साक्षरता, संज्ञानात्मक विकास, रचनात्मकता, सहानुभूति, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, भाषा कौशल।

Abstract

यह आलेख  बाल्यावस्था में चित्रों की भूमिका को एक प्रभावी अधिगम उपकरण के रूप में विश्लेषित करता है, विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में। बाल्यावस्था मस्तिष्क विकास का संवेदनशील चरण है, जहाँ दृश्य, श्रव्य और अनुभवात्मक माध्यम सीखने की नींव रखते हैं। चित्र बच्चों को जटिल अवधारणाओं को सरल रूप में समझने, शब्दावली और पठन कौशल विकसित करने तथा कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। द्वि-कोड सिद्धांत के अनुसार दृश्य और भाषाई जानकारी का संयोजन सीखने को अधिक प्रभावी और स्थायी बनाता है।

आलेख  में यह भी स्पष्ट किया गया है कि चित्र संज्ञानात्मक विकास, भावनात्मक समझ, सहानुभूति, तथा समस्या समाधान कौशल को सुदृढ़ करते हैं। वे विभिन्न अधिगम शैलियों—दृश्य, श्रव्य और क्रियात्मक—को समर्थन प्रदान करते हैं और कक्षा में सहभागिता व ध्यान अवधि को बढ़ाते हैं। NEP 2020 बाल-केंद्रित, अनुभवात्मक और बहु-संवेदी शिक्षण पर बल देती है, जिसमें चित्र आधारित सामग्री विशेष रूप से प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और आधारभूत साक्षरता के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है। निष्कर्षतः, चित्र समावेशी, प्रभावी और आनंदमय अधिगम को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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Published

15-12-2021

How to Cite

राजेश कुमार निमेश. (2021). बाल विकास और अधिगम में चित्रों की भूमिका . International Educational Applied Scientific Research Journal, 6(12). Retrieved from https://ieasrj.com/journals/index.php/ieasrj/article/view/590