लेह-लद्दाख और जम्मू-कश्मीर: अनुच्छेद 370 के निरसन और उसके बाद का परिदृश्य
DOI:
https://doi.org/10.5281/zenodo.18712220Keywords:
भारत-पाकिस्तान विभाजन, लेह लद्दाख, जम्मू कश्मीर, अनुच्छेद 370, अनुच्छेद 35(a)Abstract
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक विविधता के लिए जाने जाते हैं। 5 अगस्त 2019 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप जम्मू-कश्मीर की विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया गया और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित कर दिया गया। इस शोध पत्र में अनुच्छेद 370 के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, इसके निरसन के प्रभावों और लद्दाख व जम्मू-कश्मीर के सामाजिक-आर्थिक तथा राजनीतिक परिदृश्य में आए बदलावों का विश्लेषण किया गया है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के सबसे सामरिक और संवेदनशील क्षेत्रों में से हैं। इन क्षेत्रों को एक विशेष संवैधानिक दर्जा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए के तहत दिया गया था। 5 अगस्त 2019 को, भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया। इस कदम ने भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक ढांचे और सुरक्षा नीति को एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया।
अनुच्छेद 370 का महत्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का एक विशेष प्रावधान था, जो जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करता था। इसके तहत, जम्मू-कश्मीर को अपना संविधान बनाने और भारतीय संविधान की सीमित धाराओं को अपनाने का अधिकार प्राप्त था। इसके साथ ही, अनुच्छेद 35ए ने जम्मू-कश्मीर को अपने निवासियों को विशेषाधिकार देने का अधिकार दिया। यह ऐतिहासिक रूप से महाराजा हरि सिंह के समय से जुड़ा है, जब 1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन के दौरान जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ था।
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